रहे नहीं जी जग म ककरो अभिमानी
चलय नहीं जी जग म ककरो मनमानी
राजा रानी संत फकिरा साधू ओ सन्यासी,
सादा रण्ग के झण्डा धारे बोले गुरु घासी जी
रहे नहीं जी जग म ककरो अभिमानी
चलय नहीं जी जग म ककरो मनमानी
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बडे बडे राजा आइन, अऊ सुन्दर सुन्दर रानी
बडे बडे नेता आइन, सुन्दर बोलिन बानी
धन बल अऊ पद ल पाके, कारिन ग मनमानी
कतको झन सहादत होइन, वीर बली दानी जी
रहे नहीं जी जग म ककरो अभिमानी
चलय नहीं जी जग म ककरो मनमानी
पवन प्रचण्ड कोपकरिन, अऊ आगी पानी
अपने अपने अहम के मारे, कारिन ग नादानी
सतनाम सत पुरुष बोले सतनाम ल जानी
पांच नाम परवाना लेके, छोडीन ग कुजानी जी
रहे नहीं जी जग म ककरो अभिमानी
चलय नहीं जी जग म ककरो मनमानी
बडे बडे साधू मुनी, ए जग म आइन
सत नाम ल खोजत खोजत, तन ल तपाइन
ए तन घट भीतर बोले, वही ल पुरुष जानी
हाथ जोड़ रत्नाकर बोले, मति हे नादानी जी
रहे नहीं जी जग म ककरो अभिमानी
चलय नहीं जी जग म ककरो मनमानी